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Saturday, October 11, 2025

समुंदर

कितना हसीन होता है समुंदर

क्या कुछ नहीं होता उसके अंदर

एक गहरी गहराई उसमें होती है…

लहरों की ऊँचाई भी तो उसकी ही होती है

मोती की ख़ूबसूरती ढक के जीता है

किनारों की ख़ुशी सबको देता है

गुमसुम हो के कभी खुद में ही छिपा रहता है

तो कभी तूफ़ानों को उकसा के

         आसमान को छूने की कोशिश करता है

हम इंसान भी तो हैं एक समुंदर

क्या कुछ नहीं होता अपने अंदर

होता है हर एक में ग़मों का भंवर

फिर भी जीते हैं हम हो के मस्त कलंदर

 

-- गणेश

एहसास

 

तूने ही तो दी है ये ज़िंदगी…

मुझे जीना तो सिखा दे…

मंज़िलों की ओर जाए ऐसी एक राह तो दिखा दे…

जी तो मैं रहा हूँ पर ज़िंदा होने का एहसास मुझे करा दे…

मुझे अपनी ख़ुशी से मिला दे…

या रब्बा… मुझे अपनी ख़ुशी से मिला दे…

खोई हुई क़िस्मत मुझे मिला दे,

इतना तो करम कर, कुछ तो रहम कर…

या रब्बा, मुझ पर भी तेरी नज़र हो…

मेरी ज़िंदगी में भी तू हाज़िर हो…

बस इतना ही मागूँ…

और तेरी रहमत में पाऊँ… या रब्बा…

इश्कहारा


हर पल ग़मों से लिपटता दिल मेरा, इश्कहारा

यूँ ही गिर पड़ा धरती पर आसमान का तारा
किस्मत का है ये फ़ैसला, अब तो ख़ुदा का ही है सहारा
दर्द देना है फ़ितरत उसकी, दर्द सहना बनी आदत मेरी
तेरी चाहत ने मुझे बड़ा बेबस किया
और ख़ुदा से गहरा रिश्ता बना दिया
हर पल ख़ुदा से दुआ करता हूँ
हर राह में तुझसे मिलने आस रखता हूँ

काश ये दुआ रंग लाए
मेरी ज़िंदगी सँवर जाए
सारे ग़म मिट जाएँ
हँसी मेरी खिल जाए
काश ये दुआ रंग लाए

आशिक़ तेरा, इश्कहारा
इश्कहारा, इश्कहारा

नैना मेरे नैना

 नैना मेरे नैना  

नाज़ुक सा एक गहना  

काम है इसका ख़्वाब देखते रहना  

जो चाहे अगर ना मिले तो चुपके से आँसू बहाना  

और गुमसुम गुमसुम तन्हा रहना  

ऐसा है एक नाज़ुक सा गहना  

नैना मेरे नैना  

दिल की मुश्किलें बढ़ाए ये नाज़ुक सा गहना  

रात को अकेले चाँद को तकते रहना  

ओ मेरे नैना

काश हम एक आईना होते ..

 काश हम एक आईना होते  

जब भी देखोगे, नूर ही नूर अदा करते  


तेरी आँखों से तेरे दिल में उतरते  

दिल में उतरके अपनी एक जगह बनाते  


जब तू देखे मुझमें हँसते मुस्कुराते  

महसूस करूँ मैं मेरी खुशी तेरी हँसी में  


जब तक ना होते हमारे टुकड़े टुकड़े  

तब तक हम तुम्हें नूर ही नूर अदा करते


-- गणेश


काली रात

 काली रात से ही होती थी मेरे दिल की बात  

तू ना रहता तो कौन था इस तन्हा दिल के साथ  

सूरज से था कहता जा के भेज मेरे दोस्त को  

फिर सुन के मेरी बात सूरज भेजता था रात को  

और लगता मुझे सूरज सो गया करके आँखें बंद बंद  

पर खुद भी आता वो देखने मुझे बनके चाँद चाँद  

सूरज भी आता देखने मुझे बनके चाँद चाँद  


-- गणेश

एक हसीन जहाँ


ज़िंदगी जीने की वजह मिल ही जाएगी  

ज़िंदगी सँवर ही जाएगी  

बस कुछ पल और कोशिश कर  

कुछ और पल सब्र कर  


जी ले थोड़ा आज मायूसी के साथ  

एक दिन ये मायूसी खुशी में बदल जाएगी  

यक़ीन कर यही सच है  


सपने बिखरे हैं तेरी राहों में  

आ जाएँगे सारे सिमट कर तेरी बाहों में  


बेवजह नहीं होता कुछ यहाँ  

मेहनत से बनता है यहाँ एक हसीन जहाँ  


-- गणेश

एक इरादा



अब तो वही करना है जो ठान लिया है…  

संघर्षों के मैदान में फिर से उतरना है…  

रातों से चुरानी है आँखों की नींद…  

आख़िर तक लड़ेगा मेरे खून का एक एक बूँद…


कैसे नींद आएगी

 

कैसे नींद आएगी, कुछ बनाना अभी बाकी है  

कैसे दिल को राहत मिलेगी,  

कुछ बननेकी आग अभी बुझी नयी  

कैसे दिल को खुशी होगी,  

मंज़िल अभी पाई नही  

कैसे रुकेंगे कदम मेरे,  

हिम्मत मैने अभी हारी नही

ख्वाबो से बातचीत

                                             

                                                           

                      एक दिन मैं अपने ख्वाबो से मिलने चला,

देख के उसका नज़ारा मैं होश खो बैठा,

हुई थोड़ी बातचीत उससे पता चला ख़ैरियत उसकी,

फिर मैं बोला, कितना मुस्किल होता है ख्वाबो को पाना,

ख्वाब  बोला, जैसे तुम्हे ज़रूरत होती है ख्वाबो की,

ख्वाबो को भी ज़रूरत होती है उन्हे पाने वालो की,

एसलिए तेरे कदम कुछ देर मेरे  और चलते है और,

फिर मेरे कदम कुछ देर तेरे और चलते है..

तभी तो मंज़िले पाई जाती है


Monday, October 6, 2025

वही ज़िंदगी लानी है

 दिल रो रहा है

जिंदगी हस रही है

कब से दिल खामोश है

और थोडासा बेहोश है

बस दिन बीते जा रहे है

और उदासी छा रही है

जाने किसकी इसे आस है

और कितनी बड़ी इसकी प्यास है

बस यही सोचे जा रहा हू

हो तो कुछ भी नही रहा है

पाने की दुनिया बहोत दूर लग रही है

बस दिन बीते जा रहे है

ज़िंदगी ख्वाईशो मे अटक गई है

ख्वाब टूट गया है

ज़िंदगी रूठ गई है

तन्हाई छा गई है

पता नही ज़िंदगी किस और जा रही है

बस दिन बीते जा रहे है

अब बस वही ज़िंदगी लानी है

जो मैने सोची है

ख्वाबों को फिर से सजाना है

अपने आप को फिर से बनाना है

मंज़िल थोड़ी दूर है

रस्ता भी मुश्किल है

पर मैने भी खुद को तराशा है

मुश्किलो के आगे खुद को नापा है

चाहे दिन कैसे भी हो

हर हाल मे आगे बढ़ना है

बस वही ज़िंदगी लानी है जो मैने सोची है 

सूरज जैसी आग

आसमान मे चमकते हुए सूरज से मैने कहा,

तुझ मे भी आग है,

मुझ मे भी आग है,

तू भी जलता है,

मैं भी जलता हू,

तू दुनिया को रोशन करता है,

पर मुझसे अब तक ये नही हो पाया,

बुरा लगता है,

पर एक दिन आयेगा मैं भी दुनिया को रोशन करूँगा,

ईसलिये ये आग और बढ़ानी है,

ईसलिये मुझे और जलना है,

मुझे और जलना है…

तेरी जैसी ही आग पाकर दुनिया को रोशन करना है… 

दुख भी तो है अपना

  

 क्या सोना क्या जागना
 कहा है बिस्तर अपना
 तू चल कुछ कर
 गिरने की परवा मत कर
 दुख भी तो है अपना